Tuesday, 8 October 2019

कवि गंग व विक्रमादित्य विचार कथनी

मित्रो लग भग ढाई हजार वर्षों पहले लिखी गई बात बैताल ने कही और राजा वीर विक्रमादित्य ने लिखी थी ।


जब अकबर 700/800 वर्ष पहले लिखी गई बात को पढा तो उनकी आंखे भर आयी, और उनके राज में रहते कवि गंग को बुलाया, अकबर ने कवि गंग को कहा:- तुम भी कवि हो लेकिन एसी बात कभी नही लिखी तुमने ।

कवि गंग ने पढ़ा--



 समय से होता ज्ञान, समय से सरवर चूकें।  
 समय मूर्ख बुध्दि होय,समय से पंडित चूंकि॥ 
 समय फूले वनराय,समय सज्जन घर आवे ।  
 समय भोम छुट जाय,समय नर फेर बसावे ॥
 समय डिगावे पुरूष को,समय फेर छत्र धरे। 
बैताल कहे सूणो विक्रम समय करे नर क्या करे॥



अनुवाद:- 

            बैताल ने राजा विक्रमादित्य को कहा था, इस दूनिया में जन्म लेकर आने वाले इंसान का कोई दोष नहीं है, समय ही दोषी हैं  बुढापे में जब इंसान के हाथ में कुछ ना हो, मौत नजदीक हो! तब वह इंसान ज्ञान की ही बाते करता हैं (क्यूँ कि उसका समय अब आ गया इसलिए)। 

और समय जब इंसान का खराब आता हैं तब इंसान की बुद्धि हीन हो जाती है ! दुनिया कहती है,ये इंसान तो गलत था भी नही और इसने एसा कैसे कर दिया ! (समय उसका गलत आ गया इसलिए) समय से पंडित भी चूक जाता है लोग कहते है (इसके हिरदे से भगवान निकल गये) समय अच्छा चलता है तब मन ही मन इंसान खुश रहता है! और सज्जनों का घर पर आना जाना रहता हैं, जब समय खराब आता हैं इंसान को रहने वाली प्रोपटी को भी बेचना पङता हैं।



और समय आने पर वही इंसान उसके जैसी हजारों प्रोपटी खरीद लेता है (क्यू कि समय अच्छा आया) बैताल ने कहा है- समय ही पुरूष को राजा को रंक से जंक बनाता हैं , जब ये बात कवि गंग ने पढ़ी (कवि गंग पर भी सरस्वती माँ की असीम कृपा थी) अकबर से गंग ने कहाँ कि हुजूर ये बात गलत हैं सही नही लिखा इसमे अधूरी बात हैं।

अकबर ने कहाँ तो तू बता सही बात मैं लिख देता हूँ ।


कवि गंग कहते हैं:- 


    "कर्म प्रताप तुरंग नचावत कर्म से पुनः छत्रपती होई ।
     कर्म से कपूत सपूत कहावे, कर्म से मानुष देव कहा ॥
    कर्म गया  रावण का, सोने की लंका पल में खोई ।
    कवि गंग कहे सुण अकबर,कर्म करे करता नही कोई ।


अनुवाद:--

         कवि गंग ने कहा:- सब दोष समय का नही हैं! दोष कर्म का है इंसान को अपने कर्मो का फल जरूर मिलता है, कर्म अच्छे किए हो और समय साथ हो तो रंक भी राजा बन जाता है,सपूत बेटे को दुनिया यश नही देती हैं, कपूत हो और सपूत बन जाए तो दुनिया कहती है इसने गलत काम तो बहुत किए मगर अब तो भगवान की तरह हो गया हैं। क्यूँ (क्यूंकि बाद में कर्म अच्छे किए इसलिए कर्मो का फल है)।




इंसान जब बुरे कर्मों का भुगतान करता है तब समय साइड में हो जाता और दुनिया के सामने इंसान का सर झुक जाता हैं।(क्यूँ कि कर्म अच्छे नही किए)रावण ने कर्म अच्छे किए थे 14 विधा का विद्वान था, लेकिन सीता का हरण ही उसका मरण बन गया,जब हम कुछ भी गलत करते है तो समय हमारा कभी साथ नही देता और जब इंसान गलत करने के वर्ष बाद भी पकङा जाता हैं तो समय निकल जाता है उसे बुरे कर्मों का दंड मिलने के बाद वापस आ जाता हैं, फिर कर्म अच्छे होंगें तो समय कभी छोङकर नही जाता।
कवि गंग का ये श्लोक सुनकर अकबर फूले ना समाये और कवि गंग को दूनिया का सबसे ज्ञानवान और गुणीवान कवि बताया ।

 कर्म अच्छे करते रहो हमारा समय खुद साथ देगा । 







     

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