Friday, 28 August 2020

रामदास जी खेड़ापा, जीवनी

रामदास जी खेड़ापा

रामदास जी का जन्म (बीकमकोर) भिकमकोर में मेघवाल परिवार में हुआ,भिकमकोर जोधपुर जिले में ओसिया गांव के पास स्थित है। बचपन से ही रामदास जी ने अपना तन मन भक्ति में लगा दिया था, महाराज जी जहां भी जाते थे वहां राम नाम का सुमिरन करते थे, सुमिरन करते करते महाराज एक दिन जोधपुर के खेड़ापा गांव में पहुंचे, 


रामदास जी ने सोचा कुछ दिन यहीं परमात्मा का सुमिरन करते हैं,महाराज ने वहीं राम नाम की धुन लगाई खेड़ापा गांव के लोग महाराज को सुमिरन करते देखा तो सबको बहुत खुशी हुई ! सभी ने कहां हमारे गांव में ऐसे परम पुरुष पधारे हैं ये हमारा सौभाग्य है। गांव के सभी लोग महाराज की देखभाल करने लगे,कोई कहता आज महाराज भोजन मेरे घर करेंगे,सभी गांव वाले महाराज के साथ भगवान का भजन करने लगे,१/२ महिने के बाद गांव वालों को किसी ने आकर कहां: जिनको आप महाराज महाराज कर रहे वो कौन है ! पता है, गांव वालों ने कहां : नहीं पता हमें ।


तब उसने कहां: ये महाराज भिकमकोर का मेघवाल है, तब सभी ने कहां अब हम क्या करे, इन्होने तो हर घर में रसोई की है हम सब तो भ्रष्ट हो गए, सभी खेड़ापा वासी जोधपुर दरबार के पास फरियाद लेकर गए, जोधपुर दरबार ने कहां: आप सब की बोलो क्या फरियाद है।

गांव वालों ने कहा: भिकमकोर से एक मेघवाल जाति का महाराज हमारे यहां राम नाम का सुमिरन करने लगा, तो हमें सोचा कोई संत हैं उसने १/२ महिने में हम सब के घर रसोई कर कर के हमें भ्रष्ट कर दिया, ऐसा कहां जाता है: जोधपुर दरबार रथ लेकर खेड़ापा आए,और रामदास जी महाराज को कहां: महाराज आप भक्ति कर रहे हो बहुत अच्छी बात है,लेकिन गांव वालों को बता देना चाहिए था, आप मेघवाल जाति के हो,, 

तब रामदास जी ने जोधपुर दरबार से कहां: ये मुझसे भुल हो गई मैंने गांव वालों को ये नहीं बताया मेरी ये काया(चमड़ा) मेघवालों के घर की है, रामदास जी महाराज ने कहा: इस दुनिया को संत बनने के बाद भी जाति से ऐतराज है तो ये लिजिए मेरी काया, रामदास जी ने चमड़ा उतार कर जोधपुर दरबार के सामने रख दिया,ये चमत्कार देख गांव वाले थर थर कांपने लगे,

रामदास सिमरे राम ने गांव खेड़ापा माई ।

राजा प्रजा निवण करें फिर गई राम दुहाई ।।


 दरबार ने हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगी कहां हे ! प्रभु ऐतराज़ मुझे नहीं दुनिया को था, लेकिन अब सब की भ्रमना दुर हो गई,, फिर सभी लोगों ने रामदास जी से माफ़ी मांगी । रामदास जी ने कहा: संत बनने के बाद किसी भी संत की जाति नहीं होती, उनकी सिर्फ एक ही जाति होती है सनातन धर्म ।।

जाति मत पुछो संत की, पुछ लेना ज्ञान ।

मौल करो तलवार का,पड़ी रेण दो म्यान ।।


                            

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