दोहा:
बाल से आल, बुढ़े से विरोध, कुलक्षण नारी से ना हंसिये।
ओछे की प्रीत गुलाम की संगत,ओगट घाट ना धसिये।।
बैल को नाथ घोङे को लगाम, हाथी को अंकु से कसिये ।
कवि गंग कहें सुण शाह अकबर कुङ से सदा दूर बचिये ॥
अनुवाद:
कवि गंग ने अकबर से कहा कभी खेलते छोटे बच्चे को सताना नही चाहिए, कभी बुढ़े आदमी की परेशानी कारण ना बने, जिस औरत में लक्षण नही हो उसके सामने कभी हंसना नहीं चाहिए। जिस व्यक्ति में गुण नही उससे कभी प्रीत नहीं करनी चाहिए।
जो गुलाम है उसकी संगत नही करनी चाहिए, जहां पर भूकंप हड़कंप हो वहा ना जाना ही बेहतर है! बैल हमेशा नाक में रस्सी से हाथी अंकु से और घोङा लगाम से बंधा होता है उसी शरीर को भी अपने वश में रखे, कवि गंग ने कहा है जहाँ झूठ चलता हो वहाँ से बचकर निकल जाए (कभी खङे ना रहें) ।
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