Tuesday, 11 August 2020

बैताल और विक्रम दोहे लिरिक्स

बैताल की कही बात राजा विक्रमादित्य सुन रहे थे ।

दोहा:


वौरो भलो नी होय,काल मे पालण नी सोंन्धे ।
सगो भलो नी होय रात दिन छाती रोन्दे ।
पिता भला नी जाण राख दे कन्या कवारी ।
पुत्र भलो नी होय सिख ले चोरी  जारी ।
पुत्री भली नी होय पियर में श्र्ँगार सजावे ।
पत्नी भली नी होय पति पेला भोजन पावे ।
ठाकर भलो नी जारा, लोफर चोर नी रखवाले ।
लोभी भलो मींत, निर्धन भलो नी सालो ।
जमाई भलो नी सासरे,जीण रो घटे कायदो ।
बैताल कहे सुणो विक्रम,ईतरा मे नही फायदो ।।

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दोहा:

मरो सूम जजमान,मरो अड़ीयल टटू ।
मरो करगसा नार,मरो पुरुष निकटू ।
पुत्र वही मर जाविये,कुल में दाग लगावे।
मित्र वो मर जाविये,अड़ी मे काम नी आवे।
मरो अन्याई राजा,इतरा मरे नी रोविये ।
बेताल कहे सुणो विक्रम ए मरिया !
सुख री नीन्द सोविये ।


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