Wednesday, 26 August 2020

संतों की कथनी

जिसने देखा वो गया नहीं, जो गया उसने तोड़ा नहीं ।

तोड़ा उसने चखा नहीं, जिसने चखा उसने रखा नहीं ।।

अनुवाद:

                           एक व्यक्ति घर से बाहर निकला, उसने बग़ीचे में आम का पेड़ देखा,अब देखा किसने : आंख ने, आंखें जा नहीं सकती ! गए  पैर अब पैर तोड़ नहीं सकते,आम तोडे़ हाथ ने, हाथ खां नहीं सकते, मुंह ने आम का रसपान किया, (खाने वाला मुंह)

मुंह ने अपने पास रखा नहीं, रखा किसने पेट ने । इतने बग़ीचे का माली आया उसके पीठ पर दंडा मारा, अब देखो : देखा आंख ने, गये पैर, तोड़ा हाथ ने, खाया मुंह ने, रखा पेट ने ! और मार पड़ी पीठ को ।

कवि ने कहा इसी कड़ी में उतर है:- दंड तो पीठ को मिला आंसू कहां से निकले आंखों से यानि जिसने देखा था, उसी को सज्जा मिली ।

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