Sunday, 30 August 2020

सेवादास जी महाराज, जीवनी

सेवादास जी महाराज का जन्म नागौर जिले के मेड़ता तहसील में एक गांव में लांबा जाटान हुआ ।



सेवादास जी महाराज एक दिन अपने बड़े भाई के साथ खेत में हल चला आ रहे थे, बड़े भाई ने सेवादास जी को बोला सेवा हल की हलवाणी (हल के नीचे लगने वाली पाती) को लेकर जाओ लोहार के घर से पाना (तीखा) करवा कर लें आओ, रिमझिम बारिश हो रही थी सेवादास जी हलवाणी को लेकर लौहार के पास गए  लौहार ने कहां: सेवा भाई मेरे पास कोयला खत्म हो गया अब हलवाणी का पाना (तीखा) कैसे करूं (कोयले की आग से ही उसको तीखा किया जाता था,,)
सेवा भाई कहीं से कोयला ले आओ,,



तब सेवादास ने सोचा गांव में इतने घर है शायद किसी के घर पर कोयला मिल जाएं ! सेवादास जी एक एक बार सभी जनों के घर गए वहां जाकर थोड़ा सा कोयला मांगा, बारिश का समय था लकड़ियां सुखी नहीं थी इसलिए कोयले से लोग खाना बनाते थे, तो लोगों ने कोयला घर में होते हुएं भी मना कर दिया,, सेवादास जी गांव के लोगों पर निराश हो गए और गांव के लोगों को कहने लगे ! वाह गांव वालों वाह मैंने आज अंदाजा लगा लिया ।


 सिर्फ कोयला मांगने से मुझे आप सब की पहचान हो गई,, तुम लोग इतनी सी मदद नहीं कर सकते हो कल किसी व्यक्ति पर आई मुसीबत के साथी क्या बनोगे । फिर वहां सेवादास जी ने इस जीवन को नाशवान बताया व भगवान की भक्ति करने की मन में ठान ली । लांबा जाटान गांव से 2 किमी दूर बामणी नाडी (तालाब) की पाल है, वहां जाकर भगवान का भजन करने लगे,कहते हैं निंद्रा कभी भक्ति करने नहीं देती,जब भी आंख बंद कर ध्यान लगाते सेवादास जी को कुछ देर बार निंद आ जाती, सेवादास जी ने सोचा ऐसे तो मैं भक्ति नहीं कर पाऊंगा, उस नाडी के तट पर एक नीम का पेड़ था पेड़ का एक भाग नाडी के (पानी के) ऊपर आया हुआ था,




सेवादास जी उसी डाल पर बैठकर भगवान की भक्ति करने लगे, फिर से उन्हें नींद आ गई तो वह पानी में गिर गए ! सेवादास जी को खुशी हुई और कहां: ये जगह भक्ति करने के लायक है जब भी नींद आएगी पानी में गिरेंगे तो आंख खुल जायेंगी,वापस डाल पर चढ़ जाएंगेे, सेवादास जी बार बार पानी में गिरते वापस उसी पेड़ (नीम) की डाल पर चढ़ जाते, दिन जब वर्षों में बदल गए । सेवादास जी भक्ति में ऐसे लीन हो गए खाना पीना छोड़ दिया,, कहते हैं कि भक्ति में तप हो तो भगवान को आना ही पड़ता है, भगवान सेवादास जी महाराज के पिछे एक हाथ में पकवान का थाल (थाली) लेकर खड़े खड़े आवाज़ लगाई ।

कहां :-

मांग्या मिला नी कोयला बिन मांगे पकवान ।

सेवा तेरी अरज सुण आए खड़ा भगवान ।।

अर्थ: 

                         भगवान ने सेवादास जी से कहां: मांगने पर कोयले नहीं मिले तो क्या हुआ ! मैं बिना मांगे तेरे लिए पकवान लेकर आया हूं सेवा एक बार पिछे मुड़कर देख तेरी भक्ति से प्रसन्न होकर में आया हूं ।
जब सेवादास जी ने मुड़कर देखा तो आंखों से आंसू निकलने लगे भगवान ने सेवादास के आंसू पोंछे,और अपने हाथों से सेवादास जी को भोजन करवाया,,भगवान ने वचन दिया सेवादास तेरी इस तपो भूमि पर आने वाले हर एक श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होगी, ऐसे संत हुए सेवादास जी जिनका आज मंदिर वहीं बना हैं उसी नीम के निचे (बामणी नाडी की पाल) ।

कहां है:-

 पुष्कर जेडी़ पेढिया सेवा जेड़ा संत ।

गादी गिरधर दास री तारे जीव जंत ।।

अर्थ -

                    इस जगह को भक्तों (श्रद्धालुओं) ने पुष्कर धाम की तरह माना है, यहां गादीपति गिरधर दास जी थे फिर सेवादास जी महाराज हुए, यहां पर कई जीवो उद्धार होता है । 

---जय श्री राम 🚩---

               

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