Saturday, 15 August 2020

कवि गंग के दोहे

कवि गंग ने कलयुग में पैसों को अहम बताया है:


पैसा बिन माता कहती,पुत मेरा कपुत।
पैसे बिन भाई कहता, है ये दुःखदाई ।।
पैसे बिन काका कहता किसका भतीज तू।
पैसे बिन सास कहती किसका जवांई है।।
पैसे बिन पंच लोगों में बैठने का हक नहीं।
पैसे बिन लोक वाक यूंही हंसाई है।।
कहे कवि गंग ये है इस दुनिया के रंग ।
कलयुग में जीना है तो पैसो की बढ़ाई है ।।


अर्थ:

                                 पैसे ना हो तो मां कहती पुत्र (पुत) मेरा कुपुत्र (कपुत) है, पैसों ना हो तो भाई कहता है ये दुःख देता है, पैसे ना हो तो काका (चाचा) कहता किसका भतीज है तू ! पैसा ना हो तो सासु मां भी कहती किसका जवांई है,
पैसा पास है तो लोगों की सभा (समूह) में सबसे आगे बैठ पाओगे,पैसे नहीं तो दुनिया भी हंसेगी आप पर, कवि गंग कहते हैं ये कलयुगी दुनिया का ऐसा ही रंग है, यहां लोगों ने ही जीने के लिए पैसों को अधिक महत्व दिया है।


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