आपकी रुह कांप उठेगी ये जानकर जब देश का विभाजन हुआ तब पं नेहरु जी लालकिले पर खड़े होकर भाषण दे रहें थें उस समय पाकिस्तान की सड़कों के ऊपर माता बहनों को नंगा करके उनके जुलुस निकाले जा रहें थे,
जिंदा लोगो को कांट कांट कर रेल भर कर यहां भेजी जाती थी,
जिस तरह माला के लिए सुई में फुल डाले जाते हैं ठीक उसी तरह भाला खड़ा करके एक के ऊपर एक बच्चे को भाले में डालकर नाम लिखकर भेजते थें गांधीजी के लिए तोहफा, नेहरूजी के लिए भेंट ! नरकंकाल इधर से उधर किए जा रहें थें, और हम गीत गा रहे थे "दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल" एक बुंद भी खून नहीं बहाया ऐसा इस गीत में वर्णन है ।
उस समय12 लाख लोग मारे गए 2 करोड़ लोग बेघर हो गए वहीं लोग मीलो तक लंबे समान को उठाएं चलते रहे। कई रास्ते में दम तोड़ देते कई चलते रहें,,
जिंदा लोगो को कांट कांट कर रेल भर कर यहां भेजी जाती थी,
जिस तरह माला के लिए सुई में फुल डाले जाते हैं ठीक उसी तरह भाला खड़ा करके एक के ऊपर एक बच्चे को भाले में डालकर नाम लिखकर भेजते थें गांधीजी के लिए तोहफा, नेहरूजी के लिए भेंट ! नरकंकाल इधर से उधर किए जा रहें थें, और हम गीत गा रहे थे "दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल" एक बुंद भी खून नहीं बहाया ऐसा इस गीत में वर्णन है ।
उस समय12 लाख लोग मारे गए 2 करोड़ लोग बेघर हो गए वहीं लोग मीलो तक लंबे समान को उठाएं चलते रहे। कई रास्ते में दम तोड़ देते कई चलते रहें,,
अफसोस ये हैं : आजादी के लिए जिन्होंने खून बहाया उनका इतिहास विधालय में अब जान बूझकर नहीं पढ़ाया जाता, भारत के संत, महापुरुष, शुरवीर योद्धाओं के बारे में बच्चों को पता ही नहीं ! इसका कारण हिन्दू धर्म के इतिहास को विलुप्त किया जा रहा है ।
शुरु करते हैं हम मक्का और मदीना से - मक्का और मदीना उसका पुराना नाम मक्क और मेदिनी था, आज भी वहां मक्केश्वर महादेव की शिवलिंग हैं उन्हें ढक कर रखते हैं, जाने वाला हर मुस्लिम उसको चुम कर आता है, जिस तरह हिंदू शंकर भगवान की शिवलिंग को हाथ लगाते हैं उसी तरह मुस्लिम लोग उस लिंग को छूं कर आते हैं ! भारत से जो भी मुस्लिम हज करने जाता है वहां उनको हिंदू मुस्लिम कहां जाता है, क्यूं कि वहां के मुसलमानो को पता है कि ये मुसलमान पहले हिंदू थे फिर धर्मांतरण कर मुस्लिम बने हैं, इसलिए उनको वहां हिंदू-मुस्लिम बोला जाता है ।
मुसलमान वहां जाता है तो मुंडन करवा कर जाता है, जैसे हिंदू हरिद्वार जाते हैं तिरुपति जाते हैं तब मुंडन करवाते हैं ।
हिंदू सनातन के संत जैसे बिना सिला हुआ कपड़ा पहनते हैं उसी तरह मुसलमान वहां बिना सिला हुआ कपड़ा पहन कर जाते हैं,,जैसे हिंदू हर मंदिर में जाकर परिक्रमा लगाते हैं, मुस्लिम उस बिल्डिंग के चारों ओर परिक्रमा करके आते हैं, दुनिया की सारी मस्जिदों के ऊपर कुम्बद है लेकिन मक्का की मस्जिद के ऊपर कुम्बद नहीं है, क्योंकि वह हिंदुओं की पुरानी संस्कृत वैद्यसाला थी बच्चे पढ़ते थे वहां ! आचार्य उनको प्रकार का ज्ञान सिखाने का कार्य करते थे,
हिंदू सनातन के संत जैसे बिना सिला हुआ कपड़ा पहनते हैं उसी तरह मुसलमान वहां बिना सिला हुआ कपड़ा पहन कर जाते हैं,,जैसे हिंदू हर मंदिर में जाकर परिक्रमा लगाते हैं, मुस्लिम उस बिल्डिंग के चारों ओर परिक्रमा करके आते हैं, दुनिया की सारी मस्जिदों के ऊपर कुम्बद है लेकिन मक्का की मस्जिद के ऊपर कुम्बद नहीं है, क्योंकि वह हिंदुओं की पुरानी संस्कृत वैद्यसाला थी बच्चे पढ़ते थे वहां ! आचार्य उनको प्रकार का ज्ञान सिखाने का कार्य करते थे,
जैसे हिन्दू हरिद्वार से गंगाजल भरकर लाते हैं, वैसे ही मुसलमान वहां से पानी भरकर लाते हैं,(उसे झम झम कहते हैं) ये हिन्दू धर्म की पद्धति है लेकिन वह स्थान भारत के हाथ से चला गया ।
अब आपको बताते है: मक्का के पास एक देश है ईरान
ईरान का पुराना नाम आर्यान था ! उस देश में 80% जाट समाज व 20% ब्राह्मण समाज के लोग रहते थे, वह सारे धर्मांतरित होकर मुसलमान बन गये ।
अरबिस्तान :
एक देश है अरबिस्तान इस देश का पुराना नाम था अरवरस्थान, अरवन संस्कृत में घोड़े को कहा जाता है,अरबी घोड़े बहुत प्रसिद्ध थे,चेतक घोड़ा महाराणा प्रताप का अरबी घोड़ा ही था,वह हमारा अरवनस्थान अरबिस्तान बन गया ।
अफगानिस्तान :
1876 में बफर स्टेट के रुप में हमसे अलग किया, आजादी के आन्दोलन में अंग्रेजों ने उसको काट दिया, 6:30 लाख वर्ग किलोमीटर की वो जमीन हमसे अलग कर दी गई, दुर्योधन की माता गांधारी का जन्म स्थान था, 1876 में भारत के हाथ से चला गया ।
नेपाल :
1904 में नेपाल भारत से अलग कर दिया गया, सीता का जन्म स्थान श्री राम का ससुराल था, जनकपुरी में ! 1 लाख 47000 वर्ग किमी का क्षैत्रफल है भारत के हाथ से चला गया ।
भुटान :
1906 में नेपाल के पास भुटान नाम का देश है, 46000 वर्ग किमी का क्षैत्रफल काटकर अलग कर दिया, भारत के हाथ से चला गया ।
तिब्बत :
1916 में तिब्बत उसका पुराना नाम त्रिविस्ठप था, दलाई नामा का जन्म स्थान है, भारत और चीन के बीच तिब्बत बहुत बड़ी भुमि थी, देश की आजादी के बाद जब चीन ने आक्रमण किया तब तक ये भारत के पास था, उसकी रक्षा भारत की सेना करती थी, पं. नेहरु जी की गलती के कारण चीन ने भारत से हड़प लिया दबा लिया, 25 लाख वर्ग किमी का क्षैत्रफल भारत के हाथ से चला गया ।
श्रीलंका :
1935 में 66000 वर्ग किमी जमींन काटकर भारत से अलग कर दी गई ।
म्यामांर
म्यामार जिसका पुराना नाम बर्मा था,1937 तक बर्मा भी भारत का ही भाग था, काले पानी की सज्जा के लिए सबको पकड़ कर जहां ले जाते थें, फिर सुभाषचन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज बनाकर अपने कब्जे में कर लिया था, 6 लाख 70,000 वर्ग किमी का क्षैत्रफल 1937 में भारत से अलग कर दिया ।
बांग्लादेश :
बांग्लादेश का पुराना नाम पुर्वी पाकिस्तान था, डेढ़ लाख वर्ग किलोमीटर व पश्चिमी पाकिस्तान से 8 लाख वर्ग किमी यानि कुल साढ़े 9 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन 1947 में भारत से काटकर अलग कर दी गई ।
ऐसे महापुरुष जिन्होंने बाबर को जाबर कहां (ये पाप की बारात है, अत्यासारी बाबर) ऐसे नानकदेव जी का जन्म स्थान "ननकानासाहब" जो अभी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है ! भारत ने खो दिया ।
लाहौर :
श्री राम के पुत्र लव ने इस नगर को बसाया था, लाहौर का पुराना नाम लवपुर था, और श्री राम के पुत्र कुश ने लाहौर के ही पास जिस कुशपुर को बसाया था वर्तमान उसका नाम कुसुर है ! वह स्थान भारत ने खो दिया ।
मालद्वीप :
अंग्रेजो को अपने बेड़े रखने की जगह चाहिए थी इसलिए उन्होंने मालद्वीप को पहले से ही भारत से अलग कर दिया, 3 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का ये भाग भारत ने खो दिया ।
कई धार्मिक स्थल भारत से अलग कर दिए गए :-
ननकाना साहब (तलवंडी) :
ऐसे महापुरुष जिन्होंने बाबर को जाबर कहां (ये पाप की बारात है, अत्यासारी बाबर) ऐसे नानकदेव जी का जन्म स्थान "ननकानासाहब" जो अभी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है ! भारत ने खो दिया ।
पंजा साहब :
वली कंधारी ने पहाड़ के ऊपर से एक विशाल पत्थर को गुरु नानक देव जी पर फेंका, नानक देव ने अपना पंजा उठाया और वह पत्थर वहीं हवा में रुक गया आज उसी पंजे से पत्थर को रोकने के कारण गुरुद्वारे का नाम 'पंजा साहिब' पड़ा, वह स्थान भी भारत ने खो दिया ।
सियालकोट :
वीर हकीकत राय का जन्म स्थान भारत के हाथ से चला गया ।
तक्षशिला विश्वविद्यालय :
श्री राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष ने उस नगर की स्थापना की थी, जहां चाणक्य जैसे शिक्षक चंद्रगुप्त जैसे शिष्य अध्यन करते थें, यह स्थान भी भारत ने खो दिया ।
गुजरांवाला :
हरिसिंह नलवा ऐसे बहादुर जिन्होंने पठानों (मुसलमानों) को पीठ पीठ कर सलवार पहना दी थी, हरि सिंह का जन्म स्थान भारत ने खो दिया ।
कई पवित्र नदियां भारत से अलग कर दी गई जैसे :
सरस्वती नदी :- जिसके किनारे ऋषियों व ब्रहाम्णो ने शास्त्रों की रचना की भारत ने यह जगह खो दी,
झेलम नदी :- जिसके किनारे पंजाब के राजा पोरस ने सिकंदर के दांत खट्टे कर दिए थे, सिकंदर के बचाव के लिए वहां से बेबीलोन भागना पड़ा, भारत ने यह जगह खो दी
सिंधु नदी :- 3,600 किलोमीटर से ज्यादा लंबी और कई किलोमीटर चौड़ी इस नदी का उल्लेख हिंदू सनातन धर्म वेदों में किया जाता है, इस नदी की तिहाई भाग भारत ने खो दिया ।
सिंधु नदी :- 3,600 किलोमीटर से ज्यादा लंबी और कई किलोमीटर चौड़ी इस नदी का उल्लेख हिंदू सनातन धर्म वेदों में किया जाता है, इस नदी की तिहाई भाग भारत ने खो दिया ।
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