जल से पतला कौन है कौन भुमी से भारी।
कौन अग्न से तेज है,कौन काजल से कारी।।
अर्थ:
एक बार कबीर जी रामानंद जी के साथ सत्संग में गए, वहां बड़े-बड़े महर्षि ज्ञानी संत विराजमान थे, तब एक संत ने सोचा कबीर कैसा शिष्य हैं उनकी परीक्षा लेनी चाहिए, तब पास आकर एक ऋषि ने कबीर जी से कहां आप रामानंद जी के परम (पाठवी) शिष्य हो। मुझे एक प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा है क्या आप मेरी मदद कर सकते है।
कबीर जी ने कहा अवश्य आप मुझे प्रश्न बताइए:
तब यह प्रश्न बताया गया:
जल से पतला कौन है, कौन भूमि से भारी ।
कौन अग्नि से तेज है, कौन काजल से कारी ।।
उत्तर: जल से पतला ज्ञान है,पाप भुमि से भारी ।
क्रोध अग्नि से तेज,कंलक काजल से कारी ।।
अर्थ:
कबीर जी ने जल की तुलना ज्ञान से की, जल से पतला ज्ञान ! भूमि से भारी पाप को बताया क्योंकि जब पाप बढ़ जाता है तो (विनाश) धरती फट जाती है।
फिर अग्नि से तेज क्रोध को और बताया क्योंकि इंसान को जब क्रोध आता है तो उसकी जलन अग्नि से भी खतरनाक होती है, काजल से कारी कंलक को बताया क्योंकि जब इंसान के सर कलंक लग जाता है, तो वह दिखता नहीं लेकिन काजल से भी कारा (काला) है।
इसलिए मित्रो कबीर जी को रामानंद जी का परम (पाठवी) शिष्य कहां जाता है।
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