Friday, 7 August 2020

तुलसीदास जी का चमत्कार

ये उस समय की कहानी है जब तुलसीदास जी भगवान की भक्ति करते थे, मगर लोग उनकी भक्ति को नहीं मानते थें ।


तुलसीदास जी को गांव मे सब लोग तुलसी तुलसी कहते है उनकी भक्ति को मानते नही थे ।
 एक बार गांव से बाहर निकले तो गांव के लोग किसी कि लाश को लेकर जा रहे थे! उसके पिछे एक औरत भाग रही थी,
औरत ने सोचा मे भी मर जाऊं तब तुलसीदास जी सामने मिल गये-


दोहा:-

तुलसी आवत देखिया,सती नमायो शीश ।

तुलसी मुख से यू भणे,अमर छुड़ौ आशीष ।।


विस्तार:- वह औरत तुलसीदास जी के चरण मे गिर गई,और तुलसीदास ने कहा बेटा हमेशा सुहागन रहो!फिर औरत ने कहा:


दोहा:- 

 पीयु मारा मर गया,मैं मरने को तैयार ।

         तुलसी तेरे सवाल का क्या होगा हवाल ।।


    औरत ने कहा:- महाराज मेरा पति मर गया मैं मरने को तैयार हूँ!अब आपने सुहागन का आशीर्वाद दिया मुझे उसका क्या होगा ।


    दोहा:- तुलसी मड़ा मंगाविया मस्तक धरिया हाथ।

              मैं कुछ नी जाणू प्रभू तुम जाणो रघूनाथ ।।


    तुलसीदास जी ने गांव वालो को बोला लाश को मेरे पास लाओ! और भगवान से मन ही मन विनती कि हे!प्रभू भगत ने वचन दे दिया अब आपको ये वचन पार करना होगा! सिर पर हाथ धरते ही उस लाश मे प्राण आ गये, पुरा गांव चमत्कार देख तुलसीदास जी कि जय जय कार करने लगे ! तब तुलसी दास जी ने कहा:-


    दोहा:- तुलसी तुलसी क्या करो,तुलसी वन का घास।

             मेहर हुई रघुनाथ कि जद बणिया मैं तुलसीदास ।।


    फिर तुलसीदास जी को लोग मानने लग गये ।



    दोहा: तुलसी नर का क्या बड़ा समय बड़ी बलवान।

              काबे लूटी गोपिया वोही अर्जून वही बाण ।।

    अनुवाद:

                > तुलसीदास जी ने कहा है,इंसान समय कि वजह से ही गिरता उठता है,(जब इन्सान गलत करता है तब उसका समय गलत आ जाता है)
    दोष समय का है!अर्जून के पास एसा बाण था,(जो एक ही बार चलाने पर  सामने खड़ी सेना खत्म कर सके)लेकिन जिस समय काबो ने आतंक मचाया, गोपियो कि इज्जत खतरे मे पड़ी तब अर्जुन और उसका वो बाण साथ होते हुये भी काम नही आया ।
    क्यू कि समय बदल गया था !

    No comments:

    Post a Comment

    भारत के अनेक संतों की विचारधारा व उनका जीवनकाल Description List देखने के लिए अपने मोबाइल को (desktop site mode) करें 🙏