Wednesday, 19 August 2020

प्रेम मुनि के दोहे व सार

कोई करें उपवास, कोई अन खावे अलुणा ।
कोई खावे फलकंद, कोई बोले अनमुना ।।
कोई ठंडे तप तापे, कोई उंदेसर झूले ।
मन करे कुश्तीमान,तो वो मोक्ष मार्ग ने भुले ।।
वासना ह्रदय त्यागया बिना, विपल कर वनवास है।
कहे प्रेम मुनि हरि प्रकट बिना सब माया के दास है ।।


अर्थ: 

                          संतों ने लिखा है: भगवान के दर्शन के लिए साधु (लोग) कोई उपवास करते हैं, कोई ज्यादा अन ग्रहण करते हैं, कोई भोजन त्याग फल का आहार करते हैं, कोई मौन (अनमुना) रहते हैं,कोई सिर्फ अपना जीवन व्यापन (ठंडा तप) करते हैं, कोई शरीर को उल्टा करके तपस्या करते हैं। ये सब मोक्ष के लिए करते हैं।

संतो ने कहां हैं: जब तक शरीर में इन्द्रियों को व मन को वश में नही कर पाते तो कैसी भी तपस्या करो विफल है,
प्रेममुनि ने कहा है जब तक हरि के दर्शन हो, यहीं समझना सभी माया के दास है।


दोहा :

‌‌    जड़ी बूटी की कोई किमिया बणावे, ।
कोई के वश में वीर कोई श्मसान जगावे ।।
कोई तापे पंच धुणी, कोई बतावे मन की हुई और हुणी ।। 
धरियो वेद भेद पाए बिना,मर्ग भुख और प्यास है।
कहे प्रेम मुनि हरि प्रकट बिना, सब माया के दास है।।


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