संत वाणी
कुण भजियो भगवान,कुण तजियो अभिमान ।
कुछ किनी सेवा वंदना,कुण नर दीनो दान ।।
ध्रुव भजियो भगवान ने, प्रहलाद तजियो अभिमान ।
श्रवण किनी सेवा वंदना राजा मोरध्वज दीनो दान ।।
अर्थ:
भगवान की भक्ति तो सब करते हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है ध्रुव ने जो भक्ति की वह अटल भक्ति रही ! ध्रुव राजा उत्तानपाद के लड़के थे, भगवान के कहने पर ध्रुव ने 36000 वर्ष तक धरती राज शासन किया ।
और प्रहलाद ने सती श्रीयादेय के वहां जलती हुई नेवा (मिट्टी के बर्तन) में बिल्ली के बच्चों को जीवित देखा, प्रहलाद ने सारा अभिमान वहीं तज दिया ।
श्रवण: के जैसी माता पिता की सेवा किसी ने नहीं की ! श्रवण के पिता का नाम शांतनुऋषि, व माता का नाम ज्ञानवती था, फिर संतो ने कहा है: दानी लाखों हुए लेकिन राजा मोरध्वज ने सत्य के लिए अपने बेटे का बलिदान दे दिया । इसलिए (दानी) मोरध्वज का नाम सर्व प्रथम आता है।
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