राजस्थान की सिणधरी रियासत में एक संत हुएं ! जिनका नाम जमालाराम था,जब धन को जमीन में गाढ़ा जाता था,तब उन्होंने ये बात लिखी थी।
धन गाढ़त धरती हंसे, ओगट काडत काल ।
बाल खेलावत माता, ज्यो कारण कोईन जमाल ।।
अर्थ:
सालों पहले लोगो के पास जितना भी धन होता था,वो जमीन में गाढते थे,(बैंक का जमाना नहीं था)।
तब संतो ने कहा है: ये धरती माता खुद हंसती थी,लोगों पर जब धन मुझे ही सौंफ रहे हैं, फिर इतनी मेहनत करके इक्कठा क्यों करते हैं लोग, उतना ही कमाएं ताकि आराम जीवन यापन कर सके ।
(ओगट+ काल) यानि मौत तो द्वार पर खड़ी है, घर वाले सभी कहते है,(मरीज को) इनको निंबू पिलाओ,कोई कहता है शिकंजी बनाओ, तब संतों ने कहा है: कुछ भी खिलाओगे या पिलाओगे,आई मौत तो लेकर ही जायेगी ।
(बाल+माता) यानि १/२ वर्ष के बच्चे को माता लाड लडाती हुई सपने देखती है, मेरा बच्चा बड़ा होगा, नौकरी लगेगी ! संतो ने कहा है: बड़ा तो वो गर्भ में हो गया, बाहर आने के बाद इंसान की उम्र घटती जा रही है,(हर इंसान प्रतिदिन मौत के नजदीक जा रहा है) ।
जब संत महात्माओं में इस बात का कारण जानने की कोशिश की,, तो सिर्फ एक आशा बताई ! तब अंत में लिखा है, इसका कारण कुछ नहीं एक आशा है।
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