Thursday, 24 September 2020

नारद व भगवान विष्णु का संवाद



एक समय नारद मुनि धरती पर (मृत्युलोक) गमन कर रहें थे, एक सेठ के घर जाकर उन्होंने विश्राम किया, सेठ ने नारद मुनि की अच्छी तरह से मेहमानवाजी की ! नारद मुनि बहुत खुश हुए, सेठ के घर किसी बात की कमी नहीं थी मगर उनको कभी संतान की प्राप्ति नहीं हुई सेठ और नारद दोनों के बीच अच्छी मित्रता हो गई,




जब भी नारद मुनि मृत्यु लोक आते तो वे सेठ के घर जाना
नहीं भुलते, एक बार सेठ ने नारद से कहां : आप भगवान विष्णु को जानते हो, इस बात पर नारद को हंसी आ गई तब सेठ ने कहां आप हंस रहे हो मेरी बात पर ।
नारद मुनि : मेरे मित्र तुमने बात ही ऐसी की है मेरी हंसी निकल पड़ी । भगवान विष्णु को मैं नहीं जानता ऐसा कभी हो सकता है, उनके साथ तो मेरा हर रोज का उठना बैठना होता है ।





सेठ ने कहा : अच्छा तो मित्र मेरा एक काम कर दोगे,
नारद मुनि : अवश्य ही काम बताओ ।
सेठ : जब भी आप भगवान विष्णु के पास जाओ तो ये पुछना मेरी किस्मत में संतान का सुख है या नहीं है ।
नारद मुनि :  मित्र चिंता ना करे तुम्हारी बात मै भगवान विष्णु से अवश्य करूंगा, तब सेठ को बहुत खुशी हुई । नारद मुनि वहां से बैकुंठधाम निकल आए आते ही भगवान विष्णु से कहने लगें हे ! नारायण मृत्युलोक में एक सेठ मेरा मित्र हैं उनकी किस्मत में संतान का सुख है भी या नहीं है, भगवान विष्णु ने अन्तर ध्यान करके नारद से कहां आपके मित्र के जीवन में संतान का सुख नहीं लिखा हैं।





एक महिने के बाद पुनः नारद मुनि मृत्युलोक में अपने मित्र सेठ से मिलने आए तब सेठ ने नारद मुनि को देखा वे अति प्रसन्न हुएं ! नारद मुनि ने सेठ से कहां : मित्र मैंने तुम्हारे जीवन के बारे में भगवान विष्णु से पुछा मगर उन्होंने बताया आपके जीवन में संतान का सुख नहीं लिखा है । सेठ का मन थोड़ा सा उदास हुआ और कहां जरुर पिछले जन्म में मैंने अच्छे कर्म ना किए हो ।
नारद मुनि : चिंता ना करें मित्र इस जन्म में अच्छे कर्म करते रहो इसका फल अगले जन्म में अवश्य मिलेगा, इतना कहकर नारद मुनि अपने धाम को लौट आए ।





कुछ महिनों के बाद सेठ और सेठानी रात्रि में अपने घर पर सो रहे थे, किसी फकीर (साधु) ने आवाज लगाई उस (फकीर) साधु को जोर की भुख लगी थी, 1 रोटी देगा उसे 1 पुत्र व दो रोटी देने वाले को 2 पुत्र मिलेंगे, सेठानी ने सेठ से कहां पतिदेव आपने कुछ सुना, सेठ ने कहा हां मैंने सुना मगर यह फकीर भूखा हैं इसलिए वह पुत्र प्राप्ति का लालच दे रहा है जब भगवान विष्णु ने कह दिया हमारे जीवन में संतान का सुख नहीं है, तो इस फकीर की बातों का क्या भरोसा करना ।





फिर भी सेठानी से रहा नहीं गया उसने जाकर फकीर को 2 रोटी लाकर दी, तब उस फकीर ने कहां : जाओ बेटा आज से 9 महीने बाद तुम्हारे घर पर दो पुत्रों का जन्म होगा, सेठानी बहुत खुश हुई, कहते हैं संतों के शब्द कभी व्यर्थ नहीं जाते । उसी समयानुसार फकीर के आशीर्वाद से सेठ के घर एक साथ 2 पुत्रो का जन्म हुआ, सेठ ने पूरे गांव के लिए दावत रखी, सेठ बहुत खुश थे ।





कुछ दिनों बाद नारद मुनि का मृत्युलोक में आगमन हुआ, जब वे अपने मित्र सेठ के घर पहुंचे तो उन्होंने देखा दो बच्चे पालने में झूल रहे थे, इतना देख नारद मुनि सोच में पड़ गए, सेठ से बिना मिले  ही नारद मुनि भगवान विष्णु के पास गए और भगवान विष्णु से कहां : हे नारायण आपने तो मेरी बेइज्जती करवा दी, 
भगवान विष्णु : ऐसा क्या हुआ मुनिवर जो आप इतना गुस्सा कर रहे हो ।
नारद मुनि : जब मैंने आपसे पूछा मेरे मित्र के जीवन में संतान का सुख है या नहीं आपने कहां नहीं है ! लेकिन मैं इन आंखों से मेरे मित्र के घर दो बच्चों को देखकर आ रहा हूं जब उनके जीवन में संतान का सुख है तो नारायण आपने मुझसे झूठ क्यों कहा । 





भगवान विष्णु को नारद की बात पर हंसना आ गया, भगवान विष्णु ने कहा नारद इसमें कौन सी बड़ी बात है, तुमने सिर्फ बच्चों को देखा हैं ।
नारद मुनि : हां मगर आपने मुझसे झूठ बोलकर मुझे अपने मित्र की नजरों में गिरा दिया तब भगवान विष्णु ने कहा नारद अभी भी हमारे यहां पर तुम्हारे मित्र के जीवन में संतान का सुख नहीं है, यदि तुमने उनके घर पर दो बच्चों को देखा है तो उन पर किसी और की कृपा हुई होगी । कोई हमसे भी बड़े होंगे उन्होंने उनको पुत्र दिए होंगे ।





नारद मुनि : हे ! नारायण इस संसार में आपसे भी बड़ा कौन हो सकता है तब भगवान विष्णु ने कहा नारद भगवान से भी बड़े तपस्वी बहुत है वक्त आने पर मैं तुमको बताऊंगा कि हमसे बड़े कौन है।
इतना सुनकर नारद मुनि वहां से निकल गये ।





एक दिन भगवान विष्णु ने नारद को अपने पास बुलाया और कहा नारद मेरे पेट में जोर से दर्द हो रहा है इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए मुझे जीवित मनुष्य का कलेजा चाहिए, जल्दी जाओ नारद कलेजा ले आओ तब ही मेरा दर्द ठीक होगा, नारद वहां से दौड़कर मृत्यु लोक में आए, सबसे कहने लगे भगवान विष्णु के पेट में दर्द है कोई भी कलेजा निकाल कर दे दीजिए, कलेजा देने को कोई तैयार नहीं हो रहा था, तब वहीं फकीर पास से होकर निकला नारद की आवाज सुनकर फकीर ने नारद मुनि से कहां मेरा कलेजा ले लो उसी क्षण  फकीर (साधु) ने अपनी झोली से कटार (चाकू) निकाली अपना कलेजा निकाल कर नारद के हाथों में रख दिया ।





फकीर ने कहा : जल्दी जाओ नारद भगवान विष्णु को बहुत दर्द हो रहा होगा, नारद मुनि कलेजा हाथ में लेकर भगवान विष्णु के पास आकर बोले हे ! नारायण ये लो कलेजा किसी फकीर ने अपने हाथो निकाल कर दिया है, तब भगवान विष्णु ने कहा नारद तुमने आने में देर कर दी मेरा पेट दर्द अब ठीक हो गया है, 
नारद मुनि : हे प्रभु अब यह कलेजा कहां रखु ।
भगवान विष्णु : नारद यह कलेजा वापस उस फकीर को दे दो, नारद दौड़कर फकीर के पास आए और कहां महात्मा जी अपना कलेजा यह वापस ले लीजिए भगवान विष्णु का दर्द अब ठीक हो गया है।





 फकीर ने कहा: नारद दिया हुआ दान हम कभी वापस नहीं लेते, जाओ ये कलेजा किसी जानवर को खिला दो, यह सुन नारद हक्के बक्के रह गये, नारद को कुछ समझ नहीं आ रहा था उनके साथ ये सब क्या हो रहा था, नारद मुनि थके हुए भगवान विष्णु के पास आए तब भगवान विष्णु ने कहा: नारद आपको कुछ समझ में आया,
नारद मुनि : नहीं प्रभु, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।
भगवान विष्णु : याद करो नारद तुमने मुझे कहा था, तुम्हारे मित्र के जीवन में संतान का सुख है या नहीं, मैंने मना कर दिया फिर तुमने अपने मित्र के घर दो बच्चों को देखा था, वो पुत्र किसी और ने नहीं दिए इन्हीं फकीर (साधु) ने दिए हैं ।




भगवान विष्णु : नारद जो बिना परवाह किए अपना कलेजा निकाल कर दे सकता है तो वह पुत्र भी दे सकता है, नारद कलेजा तो तुम्हारे पास भी था, तुम्हें कहीं और जाने की कहां जरूरत थी तुम खुद भी कलेजा निकाल कर दे सकते थे, भगवान विष्णु की बात सुनकर नारद की आंखों में आंसू आ गए । 
भगवान विष्णु : नारद ये जो तपस्वी फकीर (साधु) है इनके वचन कभी व्यर्थ नहीं जाते, तब नारद को सब कुछ समझ आया ।


इसलिए मित्रों सनातन धर्म को मजबुत साधु संतों ने बनाया है,यदि साधु संतो की हम पर कृपा बनी है तब तक भगवान की कृपा हम पर बनी रहेगी ।

No comments:

Post a Comment

भारत के अनेक संतों की विचारधारा व उनका जीवनकाल Description List देखने के लिए अपने मोबाइल को (desktop site mode) करें 🙏